Delicacy & Desert

                    


एक बार एक व्यक्ति कहीं जा रहा था। रास्ते में उसे प्यास लग गयी। लेकिन वहाँ पानी का कोई स्त्रोत्र नहीं था।  थोड़ी देर बाद वहां से राजा की सवारी निकली तो उसने पानी माँगा। राजा ने कहा कि तेरी हमसे पानी मांगने की हिम्मत कैसे हुई, लेकिन तुम हमारे राज्य में बावड़ी (कुआँ ) खोद सकते हो और अपनी प्यास बुझा सकते हो।  

व्यक्ति ने अथक प्रयास करके कुआँ खोदा और अपनी प्यास बुझाई। थकान के कारण वहीं उसकी आँख लग गयी।  


कुछ समय बाद जब राजा की सवारी वापिस आई तो राजा ने देखा की वह व्यक्ति कुआँ खोद कर अपनी प्यास बुझा कर आराम से सोया हुआ है।  राजा ने सैनिक भेजकर उसे बुलवाया और कहा कि अहसान फरामोश , तू मेरा धन्यवाद करने की बजाये, मेरे राज्य के कुऐ का पानी पीकर सो यहा है। इसके लिए तुझे सजा मिलेगी। तभी राजा के एक मुँहलगे चमचे ने उसे कान में कुछ कहा।  मर ता क्या न करता, व्यक्ति को बात माननी ही पड़ीं।    

शहर जाकर यह मुनादी करवाई गयी कि हमारे महान राजा ने एक प्यासे की जान बचाने के लिए बावड़ी खुदवाकर उसे पानी पिलाया और उसकी जान बचाई।  चारों और राजा की जय जयकार होने लगी। और इतिहास में यह होता आ रहा है।  

यही आजकल हो रहा है।  जनता नेताओ के पास अपनी समस्याएं लेकर जाती और नेता लोग उनको दूसरा रास्ता दिखाकर वापिस भेज देते हैं।  जब  जनता  मेहनत करके काम कर लेती है तब नेता फोटो खिचवाने पहुँच जाते हैं और चुनाव के वक़्त उक्त कार्य का जिक्र अपने द्वारा किया गया कार्य बताकर करते हैं और वाह वाही लूटते हैं। ऐसे में अगर कोई विरोध भी करे तो उसे डरा धमकाकर चुप करा दिया है।  

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